खम्मा घणी प्रिय पाठकों,
Yatrafiber के पिछले ब्लॉग में मैंने हमारी जैसलमेर यात्रा के प्रथम दिवस के अनुभव साझां किए थे। आज के ब्लॉग में मैं दूसरे दिन के भ्रमण के बारे में बताना चाहूँगी।
दूसरे दिन सुबह 6 बजे उठकर टेंट से बाहर झाँका तो देखा सब तरफ घना कोहरा छा रहा था। 10 मीटर की दूरी पर भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। इतनी ठण्ड और कोहरे के बावजूद भी रिसोर्ट की तरफ से बिल्कुल समय पर गर्म पानी और चाय की व्यवस्था उपलब्ध करवा दी गई। चाय की चुस्कियों का आनंद लेते हुए हम फिर से बिस्तर में दुबक गए। लगभग 2 घंटे बाद कोहरा छँट गया और धूप खिल गई, जिसकी हमें बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। नहाकर तैयार होने के बाद हमने स्वादिष्ट ब्रंच (नाश्ता +लंच) का आनंद लिया और फिर घूमने के लिए गाड़ी बुलवा ली।
जैसलमेर यात्रा के दूसरे दिन हम तनोट माता के दर्शन के लिए रवाना हुए। सड़क के दोनों ओर दूर-दूर तक फैली स्वर्णिम आभायुक्त बालू रेत के दृश्य सफर को खूबसूरत बना रहे थे। जैसलमेर विंड पार्क भारत के सबसे बड़े पावन ऊर्जा संयंत्रों में से एक है। इस विंड पार्क का एक हिस्सा सम से तनोट माता जाते हुए रास्ते में देखने को मिलता है। बड़े-बड़े पंखों वाली ये पवन चक्कियाँ दूर से ही दिखाई देने लगती हैं। रेगिस्तानी परिदृश्य के बीच-बीच में दूर-दूर तक दिखने वाली ये पवन चक्कियाँ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हैं। हमारे बच्चे भी पवन चक्कियों को देखते ही उनके बारे में जिज्ञासा प्रकट करने लगे तो हमने भी उन्हें पवन चक्कियों के महत्त्व के बारे में जानकारी दी और एक जगह रूककर उन्हें पास से भी पवन चक्कियाँ दिखाईं। साथ ही हमने पवन चक्कियों के साथ खूबसूरत तस्वीरें भी लीं। इसके बाद हम आगे के सफर पर चल दिए।
रेगिस्तान भी किसी हरियाली से लदे क्षेत्र जितना ही खूबसूरत हो सकता है, यह बात रेतीले टीलों के बीच से गुजरती सड़क पर सफर करते हुए हर पल महसूस होती है। रास्ते में कोई भीड़भाड़, कोई शोरगुल नहीं होता, बस होते हैं दूर-दूर तक फैले थार मरुस्थल के सौंदर्य से भरपूर नजारे। आपाधापी वाली जिंदगी से कुछ पल चुराकर ऐसे मनोरम सफर पर आखिर कौन नहीं जाना चाहेगा? रास्ते में एक जगह हमें बड़े-बड़े रेतीले टीले दिखाई दिए, जो कि सम सैंड ड्यून्स जैसे ही सुंदर थे और वहाँ भी कैमल सफारी हो रही थी। हम भी वहाँ रुक गए और बालू रेत पर बैठकर बातें करते हुए बच्चों को मस्ती करते हुए देखते रहे।
कुछ देर बाद दो बच्चे हमारे पास अपने सुंदर सजेधजे ऊँट को लेकर आए और कहने लगे कि क्या आप हमारे शेरसिंह की सवारी करेंगे? जी हाँ दोस्तों, उन्होंने अपने ऊँट का नाम शेरसिंह रखा हुआ था और उनका शेरसिंह था भी बड़ा समझदार। वो उन बच्चों की हर बात, हर इशारे को तुरंत समझकर उसी अनुसार प्रतिक्रिया दे रहा था। हमारे बच्चे भी कैमल सफारी के लिए मचल उठे तो हमने सबसे पहले तो ऊँट पर बैठकर खूब सारी तस्वीरें लीं और फिर ‘रेगिस्तान के जहाज’ ऊँट की मजेदार सवारी का आनंद लिया। बैठे हुए ऊँट पर सवार होने के बाद जब वह खड़ा होता है, तभी से भय मिश्रित रोमांच प्रारम्भ हो जाता है। ऊँचे-नीचे टीलों पर दौड़कर चढ़ते-उतरते ऊँट की सवारी करने में मजा तो बहुत आता है, लेकिन कहीं ना कहीं गिरने का भय हाथों की पकड़ को बार-बार मजबूत करने का इशारा करता रहता है। बच्चे तो ऊँट पर बैठकर इतने आल्हादित थे कि उन्होंने कैमल सफारी दो बार की।
कैमल सफारी के बाद वहीं से हमने एक थार बुक की और आस-पास के इलाकों की सैर के लिए जीप सफारी पर चल दिए। रेतीले टीलों पर जीप सफारी करना बेहद रोमांचक अनुभव है। जीप सफारी के दौरान हमने भारतीय सेना के बंकर भी देखे। लोहे से बने इन बंकरों का उपयोग सेना के जवानों द्वारा भारत-पाक युद्ध के दौरान अपनी सुरक्षा के लिए किया गया था।
वहाँ से आगे चलकर हमने वो कुआँ, मंदिर तथा रेत के टीले देखे, जहाँ बॉर्डर फिल्म की शूटिंग की गई थी। एक सुंदर से रेत के टीले पर कुछ देर बैठकर हमने गप्पे मारे तो बच्चों को भी वहाँ खेलने का मौका मिल गया। वे दोनों कभी टीले से नीचे फिसलते तो कभी दौड़कर वापस टीले पर चढ़ते और कभी तो नाचने लगते। जीप सफारी करते हुए हमने टीलों के बीच बसा रेगिस्तानी गाँव भी देखा। गाँव के आसपास पानी की उपलब्धि के कारण कुछ हरियाली भी थी, अन्यथा वहाँ दूर-दूर तक खेजड़ी के वृक्षों तथा मरुस्थली झाड़ियों के अलावा कोई हरियाली दिखाई नहीं देती। वर्षा की अत्यधिक कमी के कारण वहाँ खेती भी नाममात्र की ही होती है।
शाम का समय हो रहा था तो लोंगेवाला वॉर मेमोरियल से ही हमने रेगिस्तान में सूर्यास्त का खूबसूरत नजारा देखा। सूरज पीले से लाल होता हुआ मानो सुनहरे रेतीले समुद्र में समा रहा था। सूर्यास्त के साथ ही हम वापस अपने रिसोर्ट की ओर लौट चले। रास्ते में हमने बहुत से हिरण, नीलगाय, तीतर, लोमड़ी जैसे रेगिस्तानी जीव भी देखे। पूरे दिन घूमकर हम सब बहुत थक गए थे, अतः रिसोर्ट पहुँचते ही हमने रात्रिभोज लिया और सोने चले गए।
क्रमशः……………
.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)





