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रविवार, 30 जनवरी 2022

करणी माता रोप वे : रोमांच, श्रद्धा और लेक सिटी के बेहतरीन नजारे

सभी पाठकों को नमस्कार,

झीलों की नगरी उदयपुर ना केवल भारत में, अपितु सम्पूर्ण विश्व में पर्यटन स्थल के रूप में पसंदीदा शहर है। यहाँ की खूबसूरती देश-विदेश से लाखों पर्यटकों को प्रतिवर्ष यहाँ खींच लाती है। Yatrafiber के आज के ब्लॉग में मैं उदयपुर के एक प्रमुख आकर्षण 'उड़नखटोला' यानि रोप वे तथा करणी माताजी मंदिर के बारे में बताने जा रही हूँ।

उड़नखटोले की यात्रा का अनुभव प्राप्त करने के लिए सबसे पहले दूधतलाई पहुँचना होता है। उदयपुरसिटी रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी महज 3 किमी है। उदयपुर बस स्टेण्ड से भी मात्र 3.5 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। यदि आप हवाई यात्रा करके उदयपुर पहुँचते हैं, तो डबोक हवाईअड्डे से दूधतलाई 26 किमी की दूरी पर स्थित है।

दूधतलाई के पास ही मचला मगरा पहाड़ी पर करणी माताजी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। दूधतलाई से करणी माताजी मंदिर तक जाने के लिए दो रास्ते हैं। एक रास्ता पैदल यात्रा का है, जिसमें सीढ़ियाँ चढ़कर मंदिर तक पहुँचना पड़ता है और दूसरा रोमांचक रास्ता है - रोप वे।

रोप वे तक पहुँचने के लिए दूधतलाई से कुछ मीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। ऑटोरिक्शा, निजी वाहन या पैदल ही आसानी से रोप वे तक पहुँचा जा सकता है। रोप वे पहुँचकर सबसे पहले टिकट लेनी होती है। टिकट का मूल्य आने व जाने दोनों का मिलाकर 117 रुपये/व्यक्ति है। यदि आप कपल टिकट यानि व्यक्तिगत रूप से पूरी ट्रॉली बुक करना चाहते हैं तो उसके लिए 450 रुपये चुकाने होते हैं।

टिकट लेने के बाद अपनी बारी आने का इंतजार करना होता है। इंतजार करते समय यहाँ स्थित रेस्तरां में बैठकर नाश्ते-खाने का आनंद भी लिया जा सकता है। हरी-भरी पहाड़ी पर ऊपर-नीचे आती-जाती ट्रॉलियों को देखते हुए पसंदीदा व्यंजनों का लुत्फ उठाने का भी अलग ही मजा है।

रोप वे यानि रस्सी से बना हुआ रास्ता। दरअसल रोप वे में एक केबल के सहारे ट्रॉली लटकी हुई रहती है और केबल की गति के साथ ही ये ट्रॉली ऊपर या नीचे गति करती है। एक ट्रॉली में 6-8 लोगों के बैठने की जगह होती है। बैठने के लिए आमने-सामने सीट होती हैं तथा चारों ओर काँच लगा होता है, ताकि आसपास के नजारों को देखा जा सके।

करणी माताजी रोप वे राजस्थान का दूसरा रोप वे है। इसकी लम्बाई 387 मीटर है। इसे पूरा करने में लगभग 3-4 मिनट का समय लगता है। यहाँ ऊपर व नीचे आने-जाने के लिए तीन-तीन ट्रॉलियाँ लगी हुई हैं। रोप वे द्वारा यात्रा करने का समय प्रातः 9:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक का है। मौसम के अनुसार यह समय बदला भी जा सकता है।

लाल, पीली, हरी इन रंग-बिरंगी ट्रॉलियों में बैठकर पहली बार यात्रा करने के अनुभव का शब्दों में वर्णन कर पाना भी कठिन कार्य है। नीचे गहरी घाटी और दूर तक फैली हरियाली के बीच हवा में लटके होने का अहसास हर किसी को रोमांचित कर देने के लिए काफी है। केबल के सहारे लटकी ट्रॉलियों में बैठकर मनोरम वातावरण की सैर का अनुभव किसी के लिए भय मिश्रित रोमांच वाला हो सकता है तो किसी के लिए एक मजेदार झूले का आनंद लेने जैसा। ऊपर जाते समय जब नीचे आने वाली ट्रॉलियाँ पास से गुजरती हैं तो सबका उत्साह अपने आप बढ़ जाता है।यात्रा के दौरान पिछोला झील का बड़ा ही सुंदर दृश्य दिखाई देता है। प्रकृति की नायाब चित्रकारी को निहारते हुए यह छोटी सी यात्रा इतनी जल्दी पूरी हो जाती है कि एक बार को ट्रॉली से उतरने का भी मन नहीं होता है।

ट्रॉली से उतरने के बाद करणी माताजी के मंदिर तक पहुँचने के लिए कुछ मीटर पैदल चलना पड़ता है। करणी माताजी को मंशापूर्णा माँ यानि मन की इच्छा पूरी करने वाली माता कहा जाता है। अनेक लोकगीतों में करणी माँ की महिमा का गुणगान किया गया है। लोगों के मन में करणी माँ के प्रति अगाध श्रद्धा है। यहाँ दूर-दूर से भक्त माताजी के दर्शन हेतु तथा अपनी मनौती हेतु आते हैं।

मुख्य गर्भगृह में ममतामयी करणी माँ की सुंदर प्रतिमा सुशोभित है। माताजी का बहुत ही सुंदर श्रृंगार किया जाता है, जिसके दर्शन पाते ही भक्तों का मन आनंद से झूम उठता है। जयकारों के बीच श्रद्धापूरित वातावरण में माँ के आगे शीश नवाकर मन को असीम शांति की प्राप्ति होती है। माताजी की प्रतिमा के साथ सेल्फी लेने पर सख्त मनाही है। मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ भी स्थापित की गई हैं।

करणी माताजी मंदिर के अतिरिक्त पहाड़ी पर 'व्यू पॉइंट्स' भी बने हुए हैं, जहाँ से उदयपुर शहर के सुंदर दृश्य देखे जा सकते हैं। दूर तक फैले उदयपुर की खूबसूरती को निहारने के लिए यह एक उत्तम स्थान है।

पहाड़ी पर ऊपर से नीचे गहराई तक फैली हरियाली और सामने हिलोरे लेती पिछोला झील में तैरती नावों का आकर्षक नजारा पर्यटकों को यहाँ काफी देर तक बैठने पर मजबूर कर देता है। यहाँ ऊपर भी रेस्तरां होने के कारण खाने-पीने की अच्छी व्यवस्था है। स्वादिष्ट व्यंजनों का जायका लेते हुए दूर पहाड़ी पर स्थित सज्जनगढ़ का किला, फतहसागर झील, पिछोला झील, दूधतलाई के साथ-साथ उदयपुर शहर के शानदार नजारों को देखना हर किसी को लुभाता है। यहाँ फिश थैरेपी का अनुभव भी लिया जा सकता है।

यहाँ कई फोटोग्राफर भी उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से यहाँ की खूबसूरत यादों को कैमरे में कैद करवाया जा सकता है। आधे से एक घंटे में फोटो का प्रिंट उपलब्ध करवा दिया जाता है। फोटो के आकार के आधार पर अलग-अलग शुल्क निर्धारित हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ राजस्थानी पोशाक भी किराये पर मिलती है, जिन्हें पहनकर सुंदर-सुंदर फोटो खिंचवाई जा सकती हैं।

पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने वाली यहाँ की एक और विशेषता है, यहाँ से दिखने वाला सूर्यास्त का अद्भुत दृश्य। ढ़लती साँझ के साथ जब सूरज बड़े से लाल गोले के रूप में सामने फैली पिछोला झील के पानी में उतरता सा प्रतीत होता है, तो प्रकृतिप्रेमियों का मन कुदरत की इस चित्ताकर्षक दृश्यावली में खोकर रह जाता है। आसमान में फैली सूरज की लालिमा मानो झील के पानी में भी सिंदूरी आभा छिटका देती है। बहुत से लोगों को इस सुंदर दृश्य की तस्वीरें लेते हुए देखा जा सकता है।

इसके अतिरिक्त यहाँ से रात को रोशनी में नहाए उदयपुर की जगमगाहट को देखना भी एक अलग ही अनुभव है। ऐसा लगता है मानो हजारों दीप एक साथ जल उठे हों।

चारों ओर के मनमोहक दृश्य, करणी माँ के दर्शन, सूर्यास्त का शानदार नजारा और उड़नखटोले की रोमांचक यात्रा का अनुभव अपनी यादों के पिटारे में जोड़ने के लिए उदयपुर आने वाले सभी पर्यटक रोप वे को अपनी यात्रा में अवश्य ही शामिल करते हैं।

गुरुवार, 6 जनवरी 2022

झरना माता वॉटरफॉल : राजस्थान का वर्षभर बहने वाला झरना

हैलो दोस्तों,

वर्तमान में मनुष्य ने काफी तरक्की कर ली है। आधुनिक तकनीकों युक्त सुख-सुविधा व मनोरंजन के लाखों साधन भी जुटा लिए हैं। परन्तु फिर भी इस कृत्रिम वातावरण से निकलकर जब कभी भी मनुष्य प्रकृति की गोद में पहुँचता है, तो उसके सारे मानसिक तनाव दूर हो जाते हैं और मन आनंद से झूम उठता है। Yatrafiber का आज का ब्लॉग प्राकृतिक सौंदर्य से ओत-प्रोत ऐसे ही एक स्थल 'झरना माताजी' से संबंधित है।

झरना माता वॉटरफॉल

झरना माताजी या झरनी माताजी के नाम से प्रसिद्ध यह स्थल राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में धरियाबाद से लगभग 25 किमी दूर दाँतलिया ग्राम पंचायत में स्थित है। धरियाबाद से निजी वाहन द्वारा लसाड़िया चौराहा होते हुए आसानी से यहाँ पहुँचा जा सकता है।

चारों ओर पहाड़ियों से घिरा हरा-भरा यह खूबसूरत स्थल लोगों के लिए श्रद्धा व आस्था का प्रतीक है, क्योंकि यहाँ पहाड़ियों के बीच बहते प्राकृतिक झरने के पास माताजी विराजित हैं। यहाँ किसी मंदिर का निर्माण नहीं किया गया है, बल्कि खुले प्रांगण में माताजी व अन्य देवी-देवताओं को स्थापित किया गया है। आस-पास के क्षेत्रों में झरना माताजी की काफी मान्यता है। लोक यहाँ अपनी मन्नत माँगने तथा माताजी के दर्शन हेतु आते हैं।

झरना माता वॉटरफॉल

झरना माता वॉटरफॉल

झरना माता वॉटरफॉल

आस्था का केन्द्र होने के साथ-साथ झरना माताजी लोगों के लिए पिकनिक स्थल के रूप में भी पसंदीदा स्थान है। ऊँची पहाड़ी से कल-कल की धवनि से गूँजित होकर गिरता प्राकृतिक झरना सहज ही लोगों को अपने आकर्षण में बाँध लेता है। झरने का स्वच्छ व पारदर्शी जल पहाड़ी से गिरकर माताजी के स्थल के पास से होकर गुजरते हुए आगे जाकर पुनः नदी के विहंगम दृश्य में बदल जाता है। इस नदी पर आगे जाकर गागरी नामक बाँध भी बना हुआ है।

झरना माता वॉटरफॉल

झरना माता वॉटरफॉल

मानसून के समय आसमान में उमड़ती काली घटाएँ तथा चारों ओर बिछी हरियाली की चूनर के बीच ऊँचाई से गिरते झरने का सुंदर दृश्य किसी का भी मन मोह लेने के लिए काफी है। इस प्राकृतिक वातावरण में विराजित माता रानी की भक्ति में लीन श्रद्धालुओं के जयकारे तथा अगरबत्तियों की खूशबू समां ही बाँध देती है।

झरना माता वॉटरफॉल

झरने के शीतल जल में नहाकर अपार आनंद की प्राप्ति होती है। मानसून के समय और विशेषकर अवकाश के दिन यहाँ लोगों की काफी भीड़ देखी जा सकती है। युवाओं के समूह झरने में मस्ती करते हुए फोटो तथा सेल्फी लेने में मग्न दिखते हैं। यहाँ आने वाले सभी लोग झरने के साफ व ठंडे जल में स्नान का लुत्फ जरूर उठाते हैं।

झरना माता वॉटरफॉल

नयनाभिराम दृश्यों से भरपूर इस प्राकृतिक स्थल के बारे में पहले आसपास के क्षेत्र के अलावा अन्य लोगों को जानकारी नहीं थी। परन्तु कुछ वर्ष पूर्व सोशल मीडिया पर यहाँ की कुछ तस्वीरें तथा वीडियो वाइरल होने के बाद लोगों में यहाँ आने को लेकर रुचि जाग्रत हुई और अब यहाँ आने वाले लोगों की संख्या में दिन-प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है। वर्तमान में प्रतापगढ़ के अलावा आसपास के अन्य जिलों से ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश, गुजरात व अन्य राज्यों से भी लोग यहाँ प्रकृति के सहज, सुरम्य वातावरण का आनंद लेने पहुँचते रहते हैं।

झरना माता वॉटरफॉल

इसे लेकर गाँव के लोगों तथा प्रशासन में भी जागरूकता उत्पन्न हुई है। लोगों ने सरपंच के साथ मिलकर यहाँ विकास कार्य प्रारंभ किया है। यहाँ आने वाले यात्रियों के लिए एक विश्रामगृह भी बनवाया गया है, जहाँ बैठकर आराम किया जा सकता है। हालांकि अभी यहाँ बहुत कम सुविधाएँ उपलब्ध हैं तथा रात्रि में रूकना भी संभव नहीं है, परन्तु भविष्य में और बेहतर सुविधाएँ होने की उम्मीद है।

झरना माता वॉटरफॉल

झरना माताजी स्थल पर कुछ छोटी-मोटी दुकानें भी स्थित हैं। इन दुकानों पर प्रसाद, फूल-मालाएँ, अगरबत्ती, पीने का पानी जैसी सामग्रियाँ उपलब्ध हैं। यहाँ चाय व पकौड़ियों की दुकानें भी स्थित हैं। झरने के शीतल जल में नहाने के बाद चाय की चुस्कियों व गर्मागर्म पकौड़ियों का जायका लेना हर किसी को पसंद आता है।

और पढ़ें - राजस्थान में इतना सुन्दर झरना : भँवर माता (प्रतापगढ़)

यहाँ आने वाले लोग अपने साथ खाने-पीने की सामग्री भी लेकर आते हैं तथा सुंदर प्राकृतिक वातावरण में बैठकर भोजन का लुत्फ उठाते हैं। कुछ लोग अपने साथ कच्ची राशन सामग्री भी लेकर आते हैं और यहीं प्रकृति के बीच भोजन बनाकर पिकनिक का आनंद उठाते हैं। ऊँचे, घने वृक्षों से ढ़की पहाड़ियों के बीच बहती नदी के किनारे बैठकर भोजन करना भला किसे अच्छा नहीं लगता है?

झरना माता वॉटरफॉल

हरीतिमा से ओतप्रोत इस सुंदर प्राकृतिक व धार्मिक स्थल पर पूरा दिन कब व्यतीत हो जाता है, पता ही नहीं चलता। यदि आप प्रकृतिप्रेमी हैं और किसी साफ-स्वच्छ, एकांत प्राकृतिक स्थल पर जाकर समय बीताने की चाह रखते हैं तो झरना माताजी अवश्य ही इसके लिए एक बेहतर विकल्प है।